२०२६ में घर खरीदने का सही समय कब है? अभी खरीदें या संपत्ति की कीमतें गिरने का इंतज़ार करें?

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“संपत्ति की कीमतें बहुत बढ़ चुकी हैं। क्या अभी घर खरीदना सही होगा, या कुछ महीने इंतज़ार करने पर यही घर सस्ता मिल सकता है?”
भारत में घर खरीदने वाले लाखों लोगों के मन में आज यही सवाल है।
एक तरफ कई शहरों में संपत्ति की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। दूसरी तरफ महंगे घर, गृह ऋण की किस्त और बढ़ती जीवन-यापन लागत ने खरीदारों को सावधान कर दिया है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी मेहनत की कमाई सही जगह लगे और वह गलत समय पर महंगी संपत्ति खरीदने की गलती न करे।
लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि “संपत्ति बाजार ऊपर जाएगा या नीचे?”
सही सवाल है—
“मेरी आय, मेरी बचत, मेरी जरूरत और जिस स्थान पर मैं संपत्ति खरीद रहा हूं, उसके आधार पर क्या अभी खरीदना मेरे लिए सही है?”
वर्ष २०२६ में भारतीय संपत्ति बाजार इसी सवाल के आसपास घूम रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अगस्त २०२६ में नीतिगत रेपो दर को ५.२५ प्रतिशत पर बनाए रखा है। इससे ऋण की लागत में फिलहाल स्थिरता दिखाई देती है। दूसरी ओर, देश के कई प्रमुख शहरों में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में वृद्धि जारी है।
इसका मतलब क्या है?
क्या घर खरीदने का समय निकल रहा है? या बाजार में सुधार आने वाला है?
आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
२०२६ में भारतीय संपत्ति बाजार की असली तस्वीर क्या है?
भारतीय संपत्ति बाजार को एक ही रंग में नहीं देखा जा सकता।
मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई जैसे बड़े शहरों की स्थिति अलग है।
वहीं सिलीगुड़ी, जयपुर, लखनऊ, इंदौर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर और दूसरे उभरते शहरों की कहानी अलग है।
यहां तक कि एक ही शहर में दो अलग-अलग इलाकों की संपत्ति की कीमत और भविष्य की मांग पूरी तरह अलग हो सकती है।
आज संपत्ति बाजार को समझने के लिए तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण हैं—
संपत्ति की कीमत + आपकी आय + ऋण की लागत
यदि आपकी आय लगातार बढ़ रही है और आपकी मासिक किस्त आराम से संभाली जा सकती है, तो संपत्ति की बढ़ती कीमत हमेशा बड़ी समस्या नहीं होती।
लेकिन यदि संपत्ति की कीमत आपकी आय से बहुत तेजी से बढ़ रही है, तो कुछ समय बाद वही घर आपकी पहुंच से बाहर हो सकता है।
क्या २०२६ में संपत्ति की कीमतें गिर सकती हैं?
यह इस समय सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है।
इसका सीधा उत्तर है—
कुछ इलाकों में कीमतों में सुधार हो सकता है, लेकिन पूरे भारत में संपत्ति की कीमतों में बड़ी गिरावट निश्चित है, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
संपत्ति बाजार कोई एक राष्ट्रीय बाजार नहीं है।
किसी इलाके में कीमतें बढ़ सकती हैं।
दूसरे इलाके में कीमतें स्थिर रह सकती हैं।
कहीं अत्यधिक आपूर्ति के कारण कीमतों में सुधार हो सकता है।
वहीं किसी नए संपर्क मार्ग, हवाई अड्डे, रेलवे या रोजगार केंद्र के कारण किसी दूसरे इलाके में मांग तेजी से बढ़ सकती है।
इसलिए केवल यह सोचकर घर खरीदने में देरी करना कि “अगले साल पूरे देश में संपत्ति सस्ती हो जाएगी” जोखिम भरा हो सकता है।
एक छोटा सा उदाहरण समझिए
मान लीजिए आज आपको ५० लाख रुपये का घर पसंद आया।
आप सोचते हैं कि एक वर्ष इंतजार करेंगे और शायद कीमत १० प्रतिशत कम हो जाएगी।
यदि ऐसा होता है तो घर की कीमत लगभग ४५ लाख रुपये रह सकती है।
आपको लगभग ५ लाख रुपये का लाभ मिल सकता है।
लेकिन यदि अगले एक वर्ष में उसी घर की कीमत ८ प्रतिशत बढ़ गई तो उसकी कीमत लगभग ५४ लाख रुपये हो सकती है।
अब इंतजार करने के कारण आपको वही घर लगभग ४ लाख रुपये अधिक में खरीदना पड़ सकता है।
इसलिए संपत्ति बाजार को पूरी तरह सही समय पर पकड़ना बहुत मुश्किल है।
सही संपत्ति को सही कीमत पर खरीदना, बाजार का बिल्कुल सही समय पकड़ने से अधिक महत्वपूर्ण है।
भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दर का घर खरीदार पर क्या असर पड़ता है?
गृह ऋण लेने वाले व्यक्ति के लिए ब्याज दर बहुत महत्वपूर्ण होती है।
अगस्त २०२६ में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर को ५.२५ प्रतिशत पर बनाए रखा है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको गृह ऋण भी ५.२५ प्रतिशत की दर से मिलेगा।
आपके ऋण की वास्तविक ब्याज दर बैंक, आपकी आय, ऋण की अवधि, आपके ऋण इतिहास और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
फिर भी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर में स्थिरता गृह खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ऋण की लागत को समझना कुछ आसान होता है।
लेकिन एक बात याद रखें—
आज की ब्याज दर हमेशा के लिए स्थिर नहीं रहती।
इसलिए केवल कम ब्याज दर की उम्मीद में संपत्ति खरीदना या खरीदने में देरी करना दोनों ही सही रणनीति नहीं हैं।
५० लाख रुपये के घर की मासिक किस्त कितनी हो सकती है?
मान लीजिए—
घर की कीमत: ५० लाख रुपये
आपकी प्रारंभिक राशि: १० लाख रुपये
गृह ऋण: ४० लाख रुपये
यदि लगभग ८ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर २० वर्षों के लिए ऋण लिया जाए, तो मासिक किस्त लगभग ३३,५०० रुपये के आसपास हो सकती है।
लेकिन केवल मासिक किस्त देखकर निर्णय लेना सही नहीं है।
घर खरीदने के बाद आपको इन खर्चों को भी ध्यान में रखना होगा—
संपत्ति कर
रखरखाव शुल्क
भवन बीमा
बिजली और पानी
आंतरिक सज्जा
फर्नीचर
पार्किंग से जुड़े खर्च
पंजीकरण और अन्य सरकारी शुल्क
आपातकालीन खर्च
इसलिए ५० लाख रुपये का घर वास्तव में आपके परिवार के लिए ५० लाख रुपये से कहीं बड़ा वित्तीय निर्णय हो सकता है।
घर खरीदते समय सबसे बड़ी गलती क्या होती है?
बहुत से खरीदार सोचते हैं—
“मेरे पास १० लाख रुपये हैं, इसलिए मैं ५० लाख रुपये का घर खरीद सकता हूं।”
यह गणना अधूरी है।
प्रारंभिक राशि देने के बाद भी आपके पास पर्याप्त बचत होनी चाहिए।
घर खरीदने के लिए तीन अलग-अलग धनराशियों के बारे में सोचना चाहिए—
पहली — प्रारंभिक भुगतान
घर खरीदने के समय दी जाने वाली राशि।
दूसरी — खरीद से जुड़े अतिरिक्त खर्च
पंजीकरण, सरकारी शुल्क, कानूनी जांच, दलाली, आंतरिक सज्जा और अन्य खर्च।
तीसरी — आपातकालीन बचत
घर खरीदने के बाद भी अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग बचत।
यदि घर खरीदने के बाद आपकी पूरी बचत समाप्त हो जाती है, तो आप घर खरीदने की क्षमता रखते हुए भी आर्थिक रूप से सुरक्षित नहीं हैं।
मासिक आय का कितना हिस्सा गृह ऋण की किस्त में जाना चाहिए?
आम तौर पर सलाह दी जाती है कि गृह ऋण की मासिक किस्त आपकी आय का बहुत बड़ा हिस्सा नहीं होनी चाहिए।
लेकिन सभी परिवारों के लिए एक ही प्रतिशत लागू नहीं किया जा सकता।
मान लीजिए परिवार की मासिक आय १.५० लाख रुपये है और गृह ऋण की किस्त ४५,००० रुपये है।
यह लगभग ३० प्रतिशत है।
लेकिन यदि परिवार के ऊपर—
बच्चों की शिक्षा का बड़ा खर्च है
वाहन का ऋण है
माता-पिता की आर्थिक जिम्मेदारी है
व्यवसाय से आय अनियमित है
आने वाले वर्षों में बड़े खर्च होने वाले हैं
तो ३० प्रतिशत भी अधिक हो सकता है।
इसलिए केवल गणित नहीं, पूरी आर्थिक स्थिति देखना जरूरी है।
अपने रहने के लिए घर और निवेश के लिए घर में क्या अंतर है?
यह अंतर समझना बहुत जरूरी है।
यदि आप अपने रहने के लिए घर खरीद रहे हैं
आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण चीजें होनी चाहिए—
परिवार के लिए सही स्थान
कार्यालय तक आने-जाने की सुविधा
स्कूल
अस्पताल
बाजार
सुरक्षा
पानी और बिजली
आसपास का वातावरण
भवन की गुणवत्ता
भविष्य में रहने की सुविधा
यदि आप घर में खुद रहने वाले हैं तो केवल इस उम्मीद में महंगा घर खरीदना कि उसकी कीमत भविष्य में दोगुनी हो जाएगी, समझदारी नहीं है।
यदि संपत्ति निवेश के लिए खरीद रहे हैं
तब आपका नजरिया अलग होना चाहिए।
आपको देखना चाहिए—
किराये की मांग
किराये से होने वाली आय
खाली रहने का जोखिम
भविष्य में कीमत बढ़ने की संभावना
आसपास रोजगार के अवसर
परिवहन सुविधा
भविष्य में आने वाली परियोजनाएं
आसपास बनने वाली नई संपत्तियां
दोबारा बेचने में आसानी
एक सुंदर घर हमेशा अच्छा निवेश नहीं होता।
कई बार छोटी लेकिन सही स्थान पर स्थित संपत्ति बेहतर निवेश साबित हो सकती है।
२०२६ में कौन-सी संपत्ति खरीदना बेहतर हो सकता है?
इसका उत्तर आपकी जरूरत पर निर्भर करता है।
तैयार घर
उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें तुरंत घर चाहिए और निर्माण में देरी का जोखिम नहीं लेना है।
निर्माणाधीन संपत्ति
यदि निर्माणकर्ता का पिछला रिकॉर्ड अच्छा है, परियोजना की कानूनी स्थिति स्पष्ट है और कीमत उचित है, तो यह विकल्प आकर्षक हो सकता है।
लेकिन निर्माण में देरी का जोखिम रहता है।
जमीन
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए जमीन आकर्षक हो सकती है।
लेकिन जमीन खरीदते समय स्वामित्व, जमीन के उपयोग, रास्ते, सरकारी रिकॉर्ड और अन्य कानूनी पहलुओं की बहुत सावधानी से जांच करनी चाहिए।
व्यावसायिक संपत्ति
दुकान, कार्यालय या अन्य व्यावसायिक संपत्ति किराये से आय देने की क्षमता रख सकती है।
लेकिन इसमें खाली रहने और दोबारा बेचने से जुड़े जोखिम आवासीय संपत्ति से अलग होते हैं।
क्या त्योहारों के समय घर खरीदना बेहतर है?
भारत में त्योहारों के मौसम में संपत्ति खरीदने की परंपरा मजबूत रही है।
इस दौरान निर्माणकर्ता और विक्रेता कई तरह के प्रस्ताव दे सकते हैं—
कीमत में छूट
आसान भुगतान योजना
अतिरिक्त सुविधाएं
पंजीकरण से जुड़े प्रस्ताव
प्रारंभिक भुगतान पर विशेष लाभ
लेकिन केवल बड़े प्रस्ताव को देखकर घर बुक नहीं करना चाहिए।
यदि कोई विक्रेता कहता है—
“आज बुक करने पर १० लाख रुपये की बचत।”
तो तुरंत पूछिए—
“सभी खर्च जोड़ने के बाद अंतिम कीमत कितनी है?”
यही असली सवाल है।
संपत्ति खरीदने से पहले इन १२ चीजों की जांच जरूर करें
१. स्वामित्व
वास्तविक मालिक कौन है?
२. पुराने स्वामित्व दस्तावेज
संपत्ति पहले किन लोगों के नाम रही है?
३. ऋण या कानूनी भार
संपत्ति पर कोई पुराना ऋण या दावा तो नहीं?
४. सरकारी अभिलेख
स्वामित्व और नामांतरण के रिकॉर्ड जांचें।
५. भवन का स्वीकृत नक्शा
निर्माण स्वीकृत योजना के अनुसार हुआ है या नहीं?
६. रेरा पंजीकरण
जहां लागू हो, परियोजना का रेरा पंजीकरण स्वतंत्र रूप से जांचें।
७. पूर्णता और उपयोग प्रमाणपत्र
तैयार भवन के मामले में लागू प्रमाणपत्रों की जांच करें।
८. संपत्ति कर
कोई पुराना कर बकाया तो नहीं?
९. बिजली और पानी के बकाये
पुराने बकाये की जांच करें।
१०. निर्माणकर्ता का रिकॉर्ड
उसकी पिछली परियोजनाएं समय पर पूरी हुईं या नहीं?
११. आसपास की कीमतें
इसी क्षेत्र में समान संपत्तियों की वास्तविक कीमत क्या है?
१२. स्वतंत्र कानूनी सलाह
बड़ी राशि निवेश करने से पहले योग्य संपत्ति कानून विशेषज्ञ से दस्तावेजों की जांच करवाना समझदारी है।
केवल पंजीकरण हो जाने से आपकी पूरी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती
बहुत से खरीदार सोचते हैं—
“पंजीकरण हो गया, अब सब कुछ पूरा हो गया।”
लेकिन संपत्ति खरीदने के बाद भी कई काम महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
जैसे—
नामांतरण
संपत्ति कर रिकॉर्ड में बदलाव
बिजली कनेक्शन का हस्तांतरण
पानी का कनेक्शन
आवासीय समिति के रिकॉर्ड
ऋण से जुड़े दस्तावेज
मूल दस्तावेजों को सुरक्षित रखना
इनमें से कौन-सी प्रक्रिया आवश्यक है, यह संपत्ति और स्थानीय नियमों पर निर्भर करता है।
इसलिए घर खरीदने के बाद भी दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना जरूरी है।
रेरा पंजीकरण क्यों महत्वपूर्ण है?
रेरा यानी रियल एस्टेट विनियमन और विकास अधिनियम का उद्देश्य संपत्ति क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
लेकिन खरीदार को केवल यह नहीं पूछना चाहिए—
“क्या यह परियोजना रेरा में पंजीकृत है?”
बल्कि यह भी देखना चाहिए—
पंजीकरण संख्या क्या है?
निर्माणकर्ता कौन है?
परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है?
स्वीकृत योजना क्या है?
निर्माण पूरा होने की निर्धारित अवधि क्या है?
उपलब्ध दस्तावेजों में क्या जानकारी दी गई है?
किसी भी परियोजना में निवेश से पहले उपलब्ध सरकारी जानकारी को स्वयं सत्यापित करना बेहतर है।
संपत्ति खरीदते समय दलाल की बात पर कितना भरोसा करें?
स्थानीय संपत्ति विशेषज्ञ और दलाल आपकी खोज को काफी आसान बना सकते हैं।
वे आपको बता सकते हैं—
कौन-सा इलाका तेजी से विकसित हो रहा है
कहां किराये की मांग ज्यादा है
किन इलाकों में नई परियोजनाएं आ रही हैं
किस क्षेत्र में पुनर्विक्रय आसान है
कौन-सी सड़क भविष्य में महत्वपूर्ण हो सकती है
लेकिन अंतिम निर्णय केवल मौखिक जानकारी पर नहीं होना चाहिए।
स्थानीय जानकारी + दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच + बाजार की तुलना
एक बेहतर निर्णय का आधार बनती है।
संपत्ति निवेश का नया नियम: केवल स्थान नहीं, मांग भी देखें
पुरानी कहावत है—
“स्थान, स्थान और स्थान।”
लेकिन आज इसमें दो और बातें जोड़ना जरूरी है—
स्थान + दस्तावेज + वास्तविक मांग
क्योंकि अच्छी जगह पर स्थित खराब दस्तावेज वाली संपत्ति परेशानी बन सकती है।
और साफ दस्तावेज वाली संपत्ति भी खराब निवेश हो सकती है यदि वहां खरीदार या किरायेदार ही न हों।
क्या छोटे और उभरते शहर २०२६ में बड़ा अवसर बन सकते हैं?
भारत का संपत्ति बाजार अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है।
कई छोटे और मध्यम शहरों में—
सड़क संपर्क
रेलवे
हवाई संपर्क
शिक्षा
स्वास्थ्य
पर्यटन
उद्योग
व्यापार
भंडारण
रोजगार
तेजी से विकसित हो रहे हैं।
इससे कुछ शहरों में आवासीय और व्यावसायिक संपत्ति की मांग बढ़ सकती है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर छोटा शहर अगला बड़ा महानगर बन जाएगा।
वास्तविक रोजगार और आर्थिक गतिविधि सबसे महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर बंगाल जैसे उभरते बाजारों में क्या देखें?
सिलीगुड़ी इसका अच्छा उदाहरण है।
शहर की भौगोलिक स्थिति, बागडोगरा हवाई अड्डा, न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन, पर्यटन, व्यापार, भंडारण और पूर्वोत्तर भारत से जुड़ाव इसे अलग तरह का संपत्ति बाजार बनाते हैं।
लेकिन यहां भी यही नियम लागू होता है—
हर संपत्ति अच्छी संपत्ति नहीं होती।
माटीगाड़ा, डागापुर, उत्तरायण, सेवोक रोड, न्यू जलपाईगुड़ी और आसपास के उभरते इलाकों की अपनी अलग मांग और संभावनाएं हैं।
इसलिए पूरे शहर की औसत कीमत देखकर निवेश करने के बजाय छोटे क्षेत्र का अध्ययन अधिक उपयोगी है।
संपत्ति निवेश का सबसे महत्वपूर्ण सवाल: भविष्य में इसे कौन खरीदेगा?
ज्यादातर लोग संपत्ति खरीदते समय पूछते हैं—
“आज कितने में मिल रही है?”
अनुभवी निवेशक पूछता है—
“कुछ साल बाद इसे कौन खरीदेगा?”
मान लीजिए आपने ७० लाख रुपये में संपत्ति खरीदी।
आपको उम्मीद है कि पांच वर्ष बाद यह १.२० करोड़ रुपये की हो जाएगी।
लेकिन यदि उस क्षेत्र में खरीदार ही बहुत कम हैं, तो कागज पर दिखाई देने वाली कीमत और वास्तविक बिक्री कीमत अलग हो सकती है।
इसलिए खरीदने से पहले पूछें—
इस इलाके में कौन रहता है?
यहां किराये की मांग कैसी है?
आसपास भविष्य में कितनी नई संपत्तियां बनेंगी?
पुनर्विक्रय में कितना समय लग सकता है?
क्या बैंक इस संपत्ति को आसानी से ऋण के लिए स्वीकार करते हैं?
क्या दस्तावेज स्पष्ट हैं?
तरलता भी निवेश के लाभ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
२०२६ में सबसे समझदार घर खरीदार कौन है?
वह व्यक्ति जो डर या लालच में निर्णय नहीं लेता।
वह केवल इसलिए संपत्ति नहीं खरीदता क्योंकि कोई कह रहा है—
“अभी नहीं खरीदा तो कभी नहीं खरीद पाएंगे।”
और वह केवल इसलिए इंतजार भी नहीं करता क्योंकि कोई कह रहा है—
“अगले साल कीमतें आधी हो जाएंगी।”
समझदार खरीदार—
अपनी आय देखता है
अपनी बचत देखता है
मासिक किस्त देखता है
स्थान देखता है
दस्तावेज देखता है
आसपास की मांग देखता है
भविष्य की योजनाएं देखता है
अंतिम कीमत की तुलना करता है
और फिर निर्णय लेता है।
तो क्या २०२६ में घर खरीदना चाहिए?
यदि आप अपने रहने के लिए घर खरीद रहे हैं और—
आपकी आय स्थिर है
पर्याप्त प्रारंभिक राशि उपलब्ध है
आपातकालीन बचत मौजूद है
मासिक किस्त आराम से संभाली जा सकती है
संपत्ति की कीमत उचित है
स्थान आपकी जरूरत के अनुसार है
सभी दस्तावेज साफ हैं
तो केवल इस उम्मीद में वर्षों तक इंतजार करना कि संपत्ति निश्चित रूप से सस्ती होगी, जरूरी नहीं है।
लेकिन यदि—
मासिक किस्त आपकी क्षमता से बाहर है
प्रारंभिक राशि जुटाने के बाद आपकी पूरी बचत समाप्त हो जाएगी
संपत्ति की कीमत आसपास के बाजार से बहुत ज्यादा है
दस्तावेज स्पष्ट नहीं हैं
पूरा निवेश केवल भविष्य की कीमत बढ़ने की उम्मीद पर आधारित है
तो इंतजार करना बेहतर निर्णय हो सकता है।
अंतिम बात: सही समय से ज्यादा जरूरी है सही संपत्ति
२०२६ का भारतीय संपत्ति बाजार न तो केवल तेजी की कहानी है और न ही गिरावट की।
यह चयन का बाजार है।
कुछ जगहों पर कीमतें बहुत बढ़ चुकी हैं।
कुछ इलाकों में अभी भी विकास की शुरुआत हो रही है।
कुछ बाजारों में वास्तविक मांग मजबूत है।
कुछ जगहों पर केवल उम्मीद के आधार पर कीमतें बढ़ी हैं।
इसलिए सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होना चाहिए—
“क्या अभी घर खरीदना चाहिए?”
बल्कि यह होना चाहिए—
“क्या यह संपत्ति, इस स्थान पर, इस कीमत में, मेरी आर्थिक स्थिति और मेरे उद्देश्य के लिए सही है?”
अगर उत्तर हां है, तो बाजार को बिल्कुल सही समय पर पकड़ने की कोशिश करने के बजाय सही संपत्ति खरीदना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
और यदि उत्तर नहीं है, तो चाहे विक्रेता कितना भी बड़ा प्रस्ताव दे, इंतजार करना ही बेहतर निवेश हो सकता है।
क्योंकि संपत्ति में सबसे महंगी गलती गलत समय पर खरीदना नहीं है।
सबसे महंगी गलती है गलत संपत्ति खरीदना।
घर खरीदने से पहले अंतिम जांच सूची
☐ अपनी मासिक आय और मौजूदा ऋण की गणना करें
☐ आपातकालीन बचत अलग रखें
☐ प्रारंभिक राशि के अलावा पंजीकरण और अन्य खर्च जोड़ें
☐ मासिक किस्त की वास्तविक क्षमता जांचें
☐ कम से कम तीन से पांच समान संपत्तियों की कीमत देखें
☐ वर्तमान और भविष्य की मांग जांचें
☐ जहां लागू हो, रेरा पंजीकरण सत्यापित करें
☐ स्वामित्व और कानूनी दस्तावेजों की जांच करवाएं
☐ संपत्ति कर और अन्य बकाया जांचें
☐ निर्माणकर्ता का पिछला रिकॉर्ड देखें
☐ कुल कीमत देखें, केवल विज्ञापन में दिखाई गई कीमत नहीं
☐ पुनर्विक्रय की संभावना समझें
☐ केवल दबाव में आकर बुकिंग न करें


